Hamida Banu Begum Biography, हमीदा बानो बेगम की जीवनी हिंदी में

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Hamida Banu Begum

Hamida Banu Begum Biography, हमीदा बानो बेगम की जीवनी हिंदी में

Hamida Banu Begum Biography: Hamida Banu Begum की कहानी मुगल साम्राज्य की सुंदरता और राजनीतिक कठिनाई को दिखाती है। 1527 में पारसी नोबल परिवार में पैदा हुई Hamida Banu Begum ने मुगल सम्राट हुमायूँ से शादी करके एक नई शुरुआत की। इस शादी के बाद वे मुगल राजनीति और सत्ता के केंद्र में आ गए, जहाँ उनकी वीरता और शक्ति का प्रदर्शन हुआ। महान सम्राट अकबर की माँ के रूप में, उनकी गाथा भारतीय इतिहास के व्यापक इतिहास से बहुत संबंधित है। हम प्रेम, संघर्ष और शाही कर्तव्यों की थीम के माध्यम से उनके व्यक्तिगत जीवन और उस युग की खोज करने का अवसर उनकी यात्रा से मिलता है।

Hamida Banu Begum Biography – हमीदा बानो बेगम की जीवनी हिंदी में

अकबर की माँ हामिद बानो बेगम भले ही शादी के बाद अपने पति हिमाओं के प्रति लोकाल रही, वफादार रही और हर समय हिमाओं का साथ निभाया के बुरे वक्त में उसके घोर संघर्ष के दिनों में उनकी हमसाया बनकर रहीं। लेकिन ये बात बहुत कम ही लोग जानते हैं कि असल में हामिद बालू बेगम हुमायूँ से शादी नहीं करना चाह रही थी और हामिद के शादी से इनकार के बाद भी 40 दिनों तक हमिदा से निकाह करने के लिए हुमायूँ मिन्नतें करते रहा। आखिर क्यों? 

ये बहुत ही आश्चर्यजनक बात है कि हुमायूँ ये भी जानता था कि उसका छोटा सौतेला भाई हिंदल मिर्जा ये नहीं चाहता था कि हमारी उससे हामिदा की शादी हो अक्चवली कुछ लोगों का ऐसा मानना है कि हिंदल मिर्जा खुद हामीदा बानो से प्यार करता था और खुद ही उससे शादी करना चाहता था। लेकिन ये बात जानते हुए भी हमारी तो बस हमीदा बानो को पाना चाहता था। इसलिए शादी के प्रस्ताव का संदेश भिजवाकर और अपनी माँ जो सौतेली माथे दिलदार बेगम उन्हें भेज कर लगातार मिन्नतें करता रहा। 

Hamida Banu Begum Mother (हमीदा बानो बेगम माँ)

Hamida Banu Begum जिसे इतिहास में मरियम मकानी अकबर की माँ के रूप में ज्यादा जाना जाता है। उनका जन्म 1527 में शेख अली अकबर जामी के घर हुआ था। कहा जाता है की Hamida Banu Begum बहुत ही खूबसूरत थी और उनकी सुन्दरता पर जो कोई देखले मोहित हुए बिना नहीं रह सकता था। हमीदा के पिता शेख अली अकबर जामी एक शिया थे और साथ ही उनके पूर्वज पर्षियन थे। तो क्या दिल्ली का ताज पाने के लिए शिया ग्रुप और पर्सियन हेल्प चाहता था? 

हुमायूँ और इसी पॉलिटिकल गेन के होप से वो हामिद के साथ वैवाहिक रिश्ता जोड़ने के लिए लगातार 40 दिन तक मिलते करता रहा। Hamida Banu Begum के पिता शेख अली अकबर जामी एक पर्षियन सूफी थे और उन्हें बाबा दोस्त के नाम से भी जाना जाता था। वे हिमायूँ के छोटे भाई जो सौतेली छोटे भाई हिंडल में जाते, स्पिरिचुअल गुरु भी थे और इसी कारण हमिदा बानो और हिंदन मिर्जा के परिवार में काफी घनिस्ता थी। और हमीदा हिंदल के घर अक्सर आ जाया करती थी। 

हिमायो को युद्ध में पराजित के बाद

जब अफगान रूलर सिरसा सूरी ने हिमायो को युद्ध में पराजित कर दिया तो दिल्ली का ताज हिमाई के हाथ से निकल गया और वो भाग कर थट्टा पहुँच गया। हिंदल मिर्जा और दिलदार बेगम के पास हिमाई की सतैली माँ दिलदार बेगम ने हिमाई के थट्टा आने पर एक समारोह का आयोजन किया जिसमें कई अतिथियों को बुलाया जिसमें हामिद बानो भी एक थीं। यहीं पर हुमायूँ पहली बार हामिद बानो को देखा और उसकी सुंदरता पर पोहित हो गया। और तुरंत इच्छा ज़ाहिर की उससे शादी करने की हामीदा उस समय मात्र 14 साल की थी और हुमायूँ 33 साल का तो हामिदा ने सीधे सीधे हुमायूँ को शादी करने से मना कर दिया। 

हिमायो का छोटा भाई हिंदल मिर्जा भी इस शादी के फेवर में नहीं था। कहा जाता है कि वो खुद हामिदा की सुंदरता पर मोहित था और खुद ही उससे शादी करना चाहता था। ऐसे में अपने बड़े भाई हिमाई से हामिदा की शादी की बात सुनकर वो काफी नाराज हो गया था। हामिद और शादी से इनकार और हिंदल की नाराजगी का भी हिमायूँ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसे तो बस हमीदा को किसी तरह मना कर शादी करनी थी।

हिमायूँ के सौतेली बहन गुलबदन बेगम ने हिमाऊ नामा में लिखा है कि अगले ही दिन हिमायू मेरी माँ दिलदार बेगम के पास आया और बोला कि किसी को भेज कर हमीदा बानो को मेरे पास बुलाओ। दिलदार बेगम ने हमिदा को हिमायो के पास आने का संदेश भिजवाये लेकिन हामिदा ने आने से सीधे सीधे मना कर दिया। 

हमीदा बानो को मेरे पास कौन-सा भेजा जाए?

उसके बाद हिमायु ने अपने एक विश्वासी सुभान कुली को ठट्टा के सुल्तान शाह हुसैन मिर्जा के पास भेजा और ये संदेश भिजवाया कि किसी भी हालत में Hamida Banu Begum को मेरे पास भेजा जाए। थट्टा के सुल्तान शाह मिर्जा ने सुभान कुली से कहा कि हमीदा मेरे कहने पर हिमायू के पास नहीं जाएगी। बेहतर होगा शुभानकुली खुद हमीदा के पास जाए और उससे हमायु का संदेश दें तो शायद वो मांग सकती है। लेकिन सुभान कुली को भी मना करते हुए हमिदा बानो ने कहा कि हमायूँ एक सुल्तान है। उन्हें एक बार वो दिलदार बेगम के समारोह में देख चुकी है। मिल चुकी है दोबारा वो नहीं मिलना चाहती।

दिलदार बेगम खुद हुमायूँ के शादी के प्रस्ताव

सुभान कुल्ली ने हामिद के जब आपको हिमायो तक पहुंचा दिया। अंत में हुमायूँ के आग्रह पर दिलदार बेगम खुद हुमायूँ के शादी के प्रस्ताव को लेकर हमीदा के पास गई और हामिदा से कहा कि आखिर 1 दिन तुम किसी ना किसी से शादी तो करोगी ही अच्छी बात है कि एक सुल्तान से निकाह कर लो जो अभी यहाँ आया हुआ है। इस पर Hamida Banu Begum ने जवाब दिया कि हाँ, बिल्कुल सही कहा आपने।

मुझे किसी ना किसी से एक ना 1 दिन शादी तो करनी ही है लेकिन मैं शादी उसी से करना चाहती हूँ जिसके लिवास के कॉलर को मैं छू सकूँ ना कि उस इंसान से जिसके स्कर्ट तक भी मैं नहीं पहुँच सकती। शायद अपने से दोगुने से ज्यादा उम्र का सुल्तान जो अपने साम्राज्य भी खो चुका था, वो हमिदा के सपनों का राजकुमार नहीं था। 

हमीदा बालो द्वारा शादी से इनकार के बाद हुमायूँ का छोटा भाई हिंदल मिर्जा ने भी हुमायूँ को समझाते हुए ऐसा कहा कि मैं हामिदा को बचपन से जानता हूँ। आप एक सुल्तान हैं लेकिन आप इस समय संघर्ष की स्थिति में हैं। तो आप निकाह के समय अपने स्टेटस के हिसाब से प्रॉपर मेहर नहीं दे पाएंगे। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मेहर एक मांडेटोरी पेमेंट होता है जो निकाह के वक़्त दुल्हन को दिया जाए।

Hamida Banu Begum संपत्ति 

सुल्तान हैं, लेकिन आप इस समय संघर्ष की स्थिति में हैं। तो आप निकाह के समय अपने स्टेटस के हिसाब से प्रॉपर मेहर नहीं दे पाएंगे। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि मेहर एक मांडेटोरी पेमेंट होता है जो निकाह के वक़्त दुल्हन को दिया जाता है और कानूनन रूप से यह दुल्हन की संपत्ति मानी जाती है।

हिमांयी चुकी हिंदुस्तान से पराजित होकर भागकर खाली हाथ ठट्टा लौटा था। तो शायद हिंडल इस बात से चिंतित था कि हुमायूँ के पास इतने मनी और पोसिशन्स नहीं है, जो हिमांयी निकाह के समय हमीदा बानो को दे सके। लेकिन हुमायूँ ने हिंदल को ये विश्वास दिला दिया कि उनके राजकीय और उनके पारिवारिक स्टेटस के हिसाब से ही हमीदा को मिहर दी जाएगी।

हिमायूँ के कहने पर दिलदार बेगम ने फिर एक बार हमीदा को कन्विंस करने की कोशिश की और हमीदा को समझाते हुए ये कहा कि हुमायूँ क्रूर, कट्टर और तानासन नहीं है। 40 दिनों की लगातार कोशिश और मिन्नतों के बाद अंत में हामिद फाइनली 1541 में एग्री हो गई और हुमायूँ से Hamida Banu Begum की शादी हो गई और हमीदा को 2,00,000 मेहर के रूप में हुमायूँ ने दिए।

यद्यपि हमीदा शुरू में बहुत नाराज़ रहती थी यह सोचकर कि उसे भी हुमायूँ के हरम में एक और ऑडिशन के रूप में रहना पड़ेगा। लेकिन इस बात में भी बिल्कुल सच्चाई है कि 15 वर्ष तक हुमायूँ के साथ हामिद बानून ने काफी क्लोज़ कंपनियों के रूप में बिताया। शायद शादी के बाद भी हिमायूँ के जीवन के हार्डशिप ने हमीदा को हिमायो के काफी नजदीक ला दिया। शेषासुरी को अब पता चल गया था कि हुमायूँ हिंदल के पास छिपा हुआ है। 

Hamida Banu Begum मृत्यु कैसे हुई?

हिंदल को आप डर समा गया कि सिरसा हिमायु का पीछा करते हुए ठट्टा पहुँच जाएगा, इसलिए उसने अपने भाई हिमायो को अपने पास से चले जाने को कहा। हिमायु हामिद के साथ भागते छिपते हुए उमरकोट पहुंचा, जहाँ उमरकोट के राजा राणा प्रसाद ने अपने यहाँ शरण दी। वहीं 1542 में हामिद ने एक पुत्र को जन्म दिया है, जो बाद में मुगलकाल का ग्रेटेस्ट रूलर अकबर द ग्रेट कहलाए।

लेकिन जल्दी ही राणा से हुमायूँ की अनबन हो गई और हिमायूँ को राना कमाल भी छोड़ना पड़ा और फिर से हुमायूँ रेफूसी होगी। आप रहने का एक ही ठिकाना बचा था हामिद का पूर्वजों का जगह परसिया भटकते हुए उसके बाद हिमायु ने परसिया जाने का निश्चय किया।

गुलबदन बेगम ने हिमायूनामा में लिखा है कि हिमायू अचानक परिसिया के लिए रवाना हो गया। रास्ते में डेज़र्ट और वाटरलेस जगह को पार करना था। हम इधर चुकी अपने पति हिमायु के साथ जा रही थी। तो अपने दिल पर पत्थर रख कर अपने बेटे अकबर को असकरी और कुछ अन्न विश्वसनीय लोगों के पास छोड़कर पति के साथ पर्सिया चली गई। बुरे समय में हुमायूँ का हमेशा साथ निभाई हमीदा सच्चे जीवन साथी के रूप में उन दिनों ना तो कोई कंफर्ट था।

हमीदा के पास ना क्वीन की तरह लक्ज़री थी और ना तू पर्सनल अटेंडेंट थे उस यात्रा में लेकिन हिमायो के डार्क डेज में हम साया की तरह हमेशा वो साथ निभाई दोस्त बनकर पत्नी बनकर प्रेरणा बनकर परसिया पहुँचकर उन्होंने पूर्वजों के श्राइन को विजिट किया। हमायें और हमिदा के संघर्ष और मेहनत रंग लाई और पर्सिया के राजा थॉमस फस ने सेना की एक टुकड़ी दी हिमाऊ को हिंदुस्तान विजय के लिए एक तो हामिद से शादी करके शिया ग्रुप का सपोर्ट मिला।

हुमायूँ को तो दूसरी और पर्सिया के सुल्तान से सैनिक सहायता और इन दोनों की बदौलत 15 साल के एक्ज़ाइल के बाद अंत में हुमायूँ दिल्ली का ताज पाने में सफल हो गया। लेकिन दुर्भाग्य बस बहुत जल्दी उसकी मृत्यु हो गई और हिमायो की मृत्यु के बाद 13 साल की उम्र में अकबर गद्दी पर बैठा।

FAQ – Hamida Banu Begum

1) हुमायूं की पहली पत्नी कौन थी?

हुमायूं की पहली पत्नी हमीदा बानो (Hamida Banu Begum) थी.

2) हुमायूं ने अपनी पत्नी को कब छोड़ा था?

1540 में 

3) अकबर की मां Hamida Banu Begum किसकी पुत्री थी?

हिदांल के गुरु की बेटी

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